गलतियों को क्षमा करके उसको गले से लगाना ही इंसानियत है।

इंसान गलतियो का पुतला है, जाने अनजाने कितनी गलतियां करता रहता है। एक इंसान होने के नाते हम सभी का फर्ज बनता है कि दूसरे की गलतीयो को नजर अंदाज करेऔर अगर कोई अपनी गलती स्वीकार करता और क्षमा मांगता है तो तुरन्त उसे क्षमा कर दे।

वैसे हम सभी के अंदर एक बहुत बुरी आदत है हमे जब अपनी गलती का अहसास होता है तो हमे लगता है कि दूसरा इंसान तो हमसे छोटा है, इससे क्या माफी मांगना।

साथियों, इंसान उम्र में छोटा बडा हो सकता है लेकिन  *मैं* हमसे छोटा या बड़ा है तो वो अपनी मेहनत, भाग्य और कर्मो के फल अनुसार होता है। एक बार बिल्कुल शांत होकर ये सोचना कि सुबह से शाम तक जाने अनजाने में हम कितनी गलतियाँ करते हैं लेकिन उसके बावजूद भी परमात्मा हमे बिना माफी के भी क्षमा कर देते हैं। तो हम इंसान इतने निर्दयी क्यों होते हैं? किसी को माफ भी नहीं कर सकते।

जिन्दगी में कभी भी कोई इंसान क्षमा मांगे तो भूलकर भी उसे नजरअंदाज मत करना क्योंकि किसी की गलतियों को क्षमा करके उसको गले से लगाना ही इंसानियत है।

कुलमालिक के चरणों में यही अरदास है कि हम सभी को इस लायक बनाएं कि हम क्षमा याचना कर सके और किसी को क्षमा कर सकें।

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14 thoughts on “गलतियों को क्षमा करके उसको गले से लगाना ही इंसानियत है।

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